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Hymns: Singing glories of the Divine to cultivate devotion

 

naaham tisthaami vaikunthe, yoginam hrdayesu va I

mad-bhaktaa yatra gayanti   tatra tisthaami naarada II   Padtma Purana 


"O Narada, I do not stay in Vaikuntha, my abode nor am I in the hearts of the yogis. I stay where My devotees sing My glories and transcendental nature."

satatam kirtayanto mam   yatantas ca drdha-vrataah I

namasyantas ca mam bhaktyaa    nitya-yukta upasate  II Bhagavad-Glta 9.14

 

Always chanting My glories, endeavoring with great determination, bowing down before Me, these great souls perpetually worship Me with devotion.

 

ekaantino yasya na kancanartham vanchanti ye vai bhagavat-prapannah

aty-adbhutam tac-caritarh sumangalam gayanta ananda-samudra-magnah I Srimad-Bhaagavatam 8.3.20

 

Unalloyed devotees, who have no desire other than to serve the Lord, worship Him in full surrender and always hear and chant about His activities, which are most wonderful and auspicious. Thus they always merge in an ocean of transcendental bliss. 

 

aho bata sva-paco 'to gariyan yaj-jihvagre vartate nama tubhyam I

tepus tapas te juhuvuh sasnur arya brahmanucur nama grnanti ye te II Srimad-Bhaagavatam 3.33.7

 

Oh, how glorious are they whose tongues are chanting Your holy name! Even if born in the families of dog-eaters, such persons are worshipable. Persons who chant the holy name of Your Lordship must have executed all kinds of austerities and fire sacrifices and achieved all the good manners of the aryans. To be chanting the holy name of Your Lordship, they must have bathed at holy places of pilgrimage, studied the Vedas and fulfilled everything required. Srlla Sanatana GosvamI renders an even stronger statement:

 

yena janma-sataih purvam    vaasudevah samarcitah I

tan-mukhe hari-naamani   sada tisthanti bharata II  Hari-bhakti-vilasa 11.454

 

Oh descendant of Bharata, he chants the holy name eternally who has previously worshipped Lord Vaasudeva in many lifetimes . 

 tebhyo namo 'stu bhava-vari-dhi-jirnaa-pahka-sammagna-moksana-vicaksana-padukebhyah

krsneti varna-yugalarh sravanena yesam anandathur bhavati nartitaroma-vrndah II Padma Purana

 

To the devotees of the Lord who are filled with transcendental ecstasy upon hearing the name of Krishna, and makes their hairs dance upright I bow down to them in great joy to the impressions of their lotus feet, which are expert in releasing the poor conditioned souls who are drowning in the ocean of birth and death, stuck in the mud of old age and disease.

evam-vratah sva-priya-nama-kirtya jatanurago druta-citta uccaih

hasaty atho roditi rauti gayaty unmada-van nrtyati loka-bahyah II Srimad-Bhagavatam 11.2.40

 

By chanting the holy name of the Lord, one comes to the stage of love of Godhead. Then the devotee is fixed in his vow as an eternal servant of the Lord, and he gradually becomes very much attached to a particular name and form of the Supreme Personality of Godhead. As his heart melts with ecstatic love, he laughs very loudly, cries, or shouts. Sometimes he sings and dances like a madman, for he is indifferent to public opinion.

 

sraddhaya helaya nama    ratanti mama jantavah

tesam nama sada partha    vartate hrdaye mama II Adi Purana 

 

O Partha,  the name of those will remain forever in My heart who repeat my name out of one pointed devotion or casually. 

 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

लक्ष्मीसेवितपदयुग  श्याम 

सुरमुनिवरगण-याचित श्याम 

भूभारोद्धरणार्थित श्याम 

लोकबन्धु-गुरु-वाचक श्याम 

धर्मस्थापन-शीलन श्याम 

स्वीकृतनरतनु-सुरवर श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

मायाधीश्वर चिन्मय श्याम 

यादवकुल-सम्भूषण श्याम 

नन्दयशोदा-पालित श्याम 

श्रीवत्साङ्कित-बालक श्याम 

मारित-मायापूतन श्याम 

शकटासुरखल-भञ्जन श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

दामोदर गुणमन्दिर श्याम 

यमलार्जुनतरु-भञ्जन श्याम 

गोपीजनगणमोहन श्याम

अगणित-गुणगण-भूषित श्याम 

अघ-वक-राक्षस-घातक श्याम 

कालियसर्प-विमर्दन श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

जय वृन्दावन-चरवर श्याम 

गोचारणरत गोधर श्याम 

बर्हसुशोभित-चूडक श्याम 

गललम्बित-वनमालक श्याम 

अग्रज-बलभद्रान्वित श्याम 

गोपवधू हृदय-स्थित श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

सर्वात्मक सर्वेश्वर श्याम 

धेनुक-खर-वधकारक श्याम 

सुरेन्द्रपूजन-वारक श्याम 

पर्वतपूजन-कारक श्याम 

सुरगणप्रार्थित-सङ्गद श्याम 

निरुपमक्रीडन-तोषण  श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

पादाराधक-विधि-हर श्याम 

गोपीभावित-प्रियकर श्याम 

नन्दित-नन्दसुनन्दन श्याम 

वैकुण्ठेश-नराकृति श्याम 

कालिन्दीतट-चारण श्याम 

मोहनमुरली-वादन श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

रासमहोत्सव-खेलन श्याम 

आनन्दामृत-वर्षण  श्याम 

बहुविधशरीर-धारण श्याम 

नानालीला-कौतुक श्याम 

ध्वजवज्राङ्कित-मृदुपद श्याम 

समस्तलोकाह्लादक  श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

वृषभारिष्ट-निपीडक श्याम 

विधिगतदर्प-विनाशक श्याम 

रुचिरस्वरुप जनार्दन श्याम 

नीलकलेवर चिद्घन श्याम 

साधकमति-संशोधन श्याम 

लीलानटन-मनोहर श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

गोपीजनगण-पूजित श्याम 

राधावेणी-शोभक   श्याम 

अक्रूरार्थित-श्लेषद श्याम 

कृत-रथयानारोहण श्याम 

व्रजनारीकुल-वारित श्याम 

सखिगण-दाहद-विरहक श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

मथुरापुरजन-मोहक श्याम 

सनकादिकमुनि-चिन्तित  श्याम 

मत्तरजकगल-घातक श्याम 

शुभपीताम्बर-धारक श्याम 

मालाकार-सुपूजित श्याम 

ब्रह्मसुपूर्ण परात्पर श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

कुब्जालेपन-नन्दित श्याम 

वक्राकृत्यृजुकारक  श्याम 

घातित-गजमद-लेपन  श्याम

केशीक-कंस-निषूदन श्याम 

पद्मगदाधर-कीर्तित  श्याम 

उग्रसेन-वरराज्यद श्याम

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

राम कृष्ण हरि-गिरिधर श्याम 

माधव केशव नरहरि श्याम 

मृतगुरूसूनु-सूजीवक श्याम 

भीष्मकबाला-कामित श्याम 

द्वारवती-संस्थापक श्याम 

रुक्मिण्यर्थ-सुहारक श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

नरकासुरवध-कारक श्याम 

अदितिसमर्पित-कुण्डल श्याम 

स्वधर्मतत्पर-मोक्षद श्याम 

शिशुपालासु-विघातक श्याम 

वाणासुरभुज-भेदन श्याम 

दानववरमधु-सूदन श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

चक्रप्रताप-सुदर्शक श्याम 

पौण्ड्रकदर्प-विमर्दक श्याम 

दग्धकाम-जनिदायक श्याम 

इन्द्रविधीश-सुसेवित श्याम 

सखिभक्तार्जुन-सारथि श्याम 

पाण्डवकुल-सम्मानित श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

गीतामृत-सन्दोहक श्याम 

भीष्मप्रतिज्ञा-पालक श्याम 

विश्वरूप-सन्दर्शक श्याम 

आत्यन्तिकसुख-साधक श्याम 

भक्तकृपार्णव-भर्गद श्याम 

शरणागतजन-तारक श्याम

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

भक्तकाम-सम्पूरक श्याम 

मङ्गलकरगति-दायक श्याम 

ऐश्वर्यादिक-षड्गुण श्याम 

विश्वाश्रय जनपालन श्याम 

सर्वचराचर-धारण श्याम 

पूर्णचराचर-खेलन श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

द्वारवतीपुर प्लावन श्याम 

कुरु-यदु-कुल संहारक श्याम 

बदरी-सम्प्रहितोद्धव श्याम 

प्रभास-गमनामोदित श्याम 

योगस्थित यदुनन्दन श्याम 

सुरगणवन्दित-मोदन श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

 

देवक्यात्मज दैवत श्याम 

मोहन नटनानन्दन श्याम 

सूचित-नरतनुत्याग श्याम 

जरलुब्धकशर-वेधित श्याम 

भक्तजनार्दन सुन्दर श्याम 

विश्वसुमङ्गल-कारण श्याम 

सत्यसनातन सुन्दर श्याम नित्यानन्द-घनेश्वर श्याम

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